Saturday, December 19, 2009

आजाद वैसे तो अपनी उम्र के बाकी लड़कों कि तरह ही था मगर फिर भी उसमें कुछ खास बातें थीं, मसलन उसकी गहरी काली आँखों में के ख़ास तरह का खिचाव था , उसकी छरहरी गोरी काया में गजब की फुर्ती थी, उसकी चाल में मसूमिअत थी मस्ती थी। और येही ख़ास बातें पिंकी की पेट में गदगुदी करती थी । पिंकी का परिवार उस कालोनी में अभी नया नया आया था । आजाद को अच्छी तरह याद है कि वो २६ सितम्बर की तारीख थी और शाम के ३ साढ़े ३ बजे का समय रहा होगा जब आजाद अपने घर की छत पर बैठ कर धूप सेंक रहा था। daltongang झारखण्ड में एक छोटा सा शहर है जहाँ सितम्बर का महीना जाड़ों का महीना होता है । धूप में बैठ कर उस दिन आजाद गाँधी जी की एक तस्वीर बना रहा था, बाएँ हाथ में उसके एक १० रूपए का नोट था और वो उस नोट पर से गाँधी की तस्वीर देखकर अपने drawing bookपर बना रहा था। एक हफ्ते बाद स्कूल में गाँधी जयंती पर drawing competition था । ठीक उसी समय आजाद ने देखा कि कालोनी के मेन गेट से एक धुल उडाता हुआ सामान से भरा हुआ ट्रक भीतर घुसा और आजाद के घर के ठीक सामने वाले घर के बाहर आकर रुका। वो पिंकी की फॅमिली थी जो कालोनी में नयी नयी आई थी। आजाद ने पिंकी को देखा , और आजाद को लगा के आज कोई खास दिन है। पिंकी की खूबसूरती की खबर आजाद के दोस्तों में तुरंत फ़ैल गयी। पिंकी की उम्र भी यही कोई १४-१५ साल की होगी। पिंकी के भीतर भी वोही biological changes आ रहे थे जो इस उम्र की लड़कियों में आते हैं। ये वोही उम्र होती है जब प्यार का एहसास हमारे दिलों को जोर से धडकाना शुरू करता है जब हम किसी ऐसे को देखते हैं जो हमें पसंद आने लगे । ये तकरीबन डेढ़ दो महीने पहले की बात है। दोस्त यारों ने मिलकर आजाद को हीरो बनाया और खुद साइड हीरो की भूमिका निभाने लगे।पिंकी को इस नयी जगह पर hiroine का रोल निभाने में बिलकुल बुरा नहीं लग रहा था, बल्कि यूँ कहें कि अच्छा लग रहा था, तो गलत नहीं होगा। आजाद को घंटों अपने घर के बाहर यूँ ही टहलते हुए देखा गया, पिंकी से २० फीट की दूरी बनाकर स्कूल तक पिंकी का पीछा करता हुआ देखा गया। पिंकी जिस रंग के कपडे पहनती थी उसी रंग के कपडे पहनते देखा गया आजाद को।और एक दिन जब पिंकी ने उस रंग के कपडे पहने जिस रंग कि शर्ट आज़ाद सुबह से पहना हुआ था, तो यारों को लगा के मामला बन रहा है। फिर दूरियां २० फीट से १५ फीट हुईं फिर १० फीट फिर ५ फीट........... । रात में बत्तियां जला बुझा कर इशारे किये गए और आखिरकार एक दिन आजाद और पिंकी के घर के बीच वाले मैदान में आजाद के दोस्तों ने कबड्डी के मैच का आयोजन किया । पिंकी घर से बाहर बरामदे में आई और मैच शुरू हुआ। आजाद के सारे दोस्त जैसे आजाद के प्यार के ही लिए खेल रहे थे। और जब सारे साइड हीरो एक एक कर हार कर बाहर चले गए और आजाद जब हीरो से सुपर हीरो हो गया तो पहली बार उसने एक हवाई kiss उछाला और आज पहली बार पिंकी ने भी ठीक उसी वक़्त आसमान की तरफ देखते हुए एक हवाई चुम्बन फेंका और यारों को लगा के सिग्नल ग्रीन है। पिछले डेढ़ दो महीने की मेहनत रंग लाई थी ..... उसी शाम कालोनी के मेन गेट पर, ६ बजे के बाद जब कालोनी की बत्ती गुल हो गयी ये नए नए प्रेमी प्रेमिका एक दुसरे को चूम रहे थे किसी अँधेरी जगह पर , तो पिंकी की मां ने इन्हें रंगे हाथों पकड़ा। जवान होती लड़की की मां ने घबराहट में ऐसा कोहराम मचाया की मामला सरे आम हो गया ।

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