Wednesday, February 4, 2009

जब लोहे से बाजा लोहा

मैं खन्न से टूट गयी

दौडी यूँ तो बहुत मैं लेकिन

गाडी छूट गयी

सुना है जा रहा है

नबी का काफिला पैदल

अगर चलता है

तो आ चल

अगर चलता है

तो आ चल

चल पैदल पैदल

चल पैदल यारा

साथ नबी के हो ले तू भी

दरवाजे से निकल

खुदा के पास जाना है

मुक्कादर आजमाना है

अगर उसको मनाना है

तो तू

अपने भीतर से निकल

चल पैदल पैदल

चल पैदल यारा

चाँद की सोहबत थी

अल्लाह से जब टकराई मैं

अपनने ही टुकड़े चुन चुन कर

लेकर आई मैं

ईद पे नींद उडी थी

हुई मैं

उस दिन से आवारा

चल पैदल यारा

चल पैदल पैदल

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