Monday, April 27, 2009

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चेहरों पे नई मुस्कान
आंखों में नया सम्मान
इक रुत्बा हासिल कर जाना है

Sunday, April 26, 2009

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झूठे वादों के कच्चे मकान
ढह गए देख कर तूफ़ान
इंटों को जोड़ते जाना है ......

कभी घर हो गया वीरान
कभी मैं हो गयी मेहमान
दरवाजे से बाहर आना है ......

Saturday, April 25, 2009

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रस्ता ये नहीं आसान
ढूंढेंगे नई पहचान
क़दमों में kismat को लाना है

हम parindon ने ली है उड़ान
रख के पंखों तले आसमान
सूरज को चूम के आना है

हुई इस घर कभी मेहमान
रही उस दर कभी अनजान
अब डर के बाहर भी जाना है

सूखी आँखों का है फरमान
के डूबेगा रेगिस्तान
दरिया को मोड़ के लाना है

हकीकत करेंगे बयान
हम इतने नहीं बेजुबान
हर बाजी जीत के आना है

Thursday, April 23, 2009

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रस्ता ये नहीं आसान
पर हम भी नहीं नादान
चल देंगे ....तो पा ही जायेंगे
इक रुत्बा ....ढूंढ के आयेंगे

Wednesday, April 22, 2009

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रस्ता ये नहीं आसान .............
ढूंढेंगे नई पहचान .................
.............बाजी ये जीत के आयेंगे
.....क़दमों में किस्मत को लायेंगे

Tuesday, April 21, 2009

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रस्ता ये नहीं आसान................
पर होगी नई पहचान ................
हूँ हूँ हूँ ...........
......आगे बढ़ जाना है .... जाना है
.......इक रुत्बा .......
..... ढूंढ के लाना है.... लाना है .......

Saturday, April 11, 2009

आठ चालीस

कभी इसकी
कभी उसकी
रही सबकी सिवा अपने
जिन्हें देखा था आंखों में
वो निकले गैर के सपने
कभी धोखा मिला मुझको
कभी cheating हुई मुझसे
मगर मैं ढूँढने निकली तो
फ़िर से मिल गयी खुशियाँ
कभी बीवी थी मैं इसकी
कभी बेटी थी मैं उसकी
कभी मैं माँ हुई
और फ़िर कभी क्या क्या हुई जाने
मेरी अपनी कहानी में
मेरी पहचान शामिल है
के मैं
आजाद होना चाहती हूँ
अपनी मर्जी से
के मेरे दोस्तों ने
मुझको ताकत दी है
लड़ने की
कई चेहरे मेरे जैसे
जो मेरे हमसफ़र हैं अब
...................................
के मुझको जिंदगी में
और लड़ना है अभी आगे
के इस मुश्किल सफर में
और बढ़ना है अभी आगे....
बहुत खुशियाँ हैं
जो मैं ढूंढती हूँ आठ चालीस पे
के खुशियों की घड़ी का
ये सफर है
आठ चालीस पे
के सच्ची मुस्कराहट का ये घर है
आठ चालीस पे
के अक्सर आठ चालीस पे
सभल जाती है ये दुनिया